चंदौली—जमीन की प्लाटिंग के नाम पर 59.33 लाख रुपये लेने, इसके बदले ऐसी जमीन का बैनामा कराने जिस पर विक्रेता का वास्तविक कब्जा और पर्याप्त हिस्सा नहीं होने तथा बाद में दूसरी जमीन देने का आश्वासन देकर मामले को टालने का आरोप सामने आया है. वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र निवासी शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय ने इस संबंध में पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र को प्रार्थना पत्र देकर राजीव कुमार पाण्डेय निवासी वास्तु विहार कॉलोनी औद्योगिक नगर थाना मुगलसराय के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है. उपमहानिरीक्षक के निर्देश पऱ अलीनगर थाने में आरोपी राजीव कुमार पांडे के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है.
प्रार्थी के अनुसार वर्ष 2021 में उसके मित्र सुनील चतुर्वेदी के माध्यम से राजीव पाण्डेय से परिचय हुआ था. राजीव ने स्वयं को जमीन का कारोबारी बताते हुए वास्तुबिहार कालोनी, औद्योगिकनगर क्षेत्र में जमीन की प्लाटिंग के लिए धन की आवश्यकता बताई. विश्वास में आकर प्रार्थी ने अपने बैंक खाते से अलग-अलग तिथियों में राजीव पाण्डेय के खाते में कुल 59 लाख 33 हजार रुपये भेजे.
प्रार्थी का आरोप है कि बाद में रुपये वापस मांगने पर राजीव ने मड़िहान, मीरजापुर में करीब 20 बीघा जमीन को धनराशि की गारंटी के तौर पर उसके नाम बैनामा कराने की बात कही, राजीव के कहने पर छह जुलाई 2021 को तहसील मड़िहान जाकर प्रार्थी ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. बाद में लेखपाल से उसे जानकारी मिली कि बैनामा में दर्शाई गई जमीन मौके पर उपलब्ध नहीं है.
मौके पर जमीन नहीं मिलने का आरोप —
शैलेन्द्र के अनुसार मड़िहान में जमीन देखने पर बैनामा में दर्शाए गए रकबे के अनुसार जमीन मौके पर नहीं मिली. इस पर राजीव ने मड़िहान की जमीन छोड़कर बरईपुर, एलआइसी कालोनी, नरायनपुर में जमीन देने का आश्वासन दिया. आरोप है कि राजीव ने वहां 5.5 बिस्वा जमीन देने की बात कही और प्रार्थी ने वर्ष 2024 में करीब तीन लाख रुपये खर्च कर उसकी बाउंड्री भी करा दी. इसके बावजूद अब तक न तो धनराशि वापस की गई और न ही जमीन का बैनामा उसके पक्ष में कराया गया.
प्रार्थी ने तहसील से जानकारी जुटाने पर आरोप लगाया कि जिस जमीन का बैनामा उसके पक्ष में कराया गया था, उसके संबंध में पूर्व में भी अलग-अलग लोगों के पक्ष में बैनामे किए गए थे. उसका आरोप है कि संबंधित विक्रेता ने अपने हिस्से से अधिक जमीन का विक्रय किया और उसी भूमि का दोबारा भी बैनामा किया गया.
दस्तावेजों में 15 लाख, बाकी 44.33 लाख रुपये का दावा—
प्रार्थी के मुताबिक उसके पक्ष में किए गए विक्रय पत्र में भूमि का मूल्य 15 लाख रुपये दर्शाया गया, जबकि उसके अनुसार राजीव पाण्डेय के पास उसकी कुल 59.33 लाख रुपये की रकम में से 44.33 लाख रुपये शेष रह गए। आरोप है कि रकम वापस मांगने पर गाली-गलौज और जानमाल की धमकी भी दी जा रही है.









