Jai tiwari —
चंदौली—दवा कारोबारी रोहिताश पाल उर्फ रोमी पाल हत्याकांड और धानापुर के चर्चित मुट्टून यादव हत्याकांड में आरोपित अभिषेक सिंह उर्फ पहलवान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. रोहिताश पाल हत्याकांड में न्यायालय ने अभिषेक सिंह के खिलाफ उद्घोषणा जारी की है. न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने उसके घर पर नोटिस चस्पा कर उसे न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया है.
मुगलसराय के प्रतिष्ठित दवा कारोबारी रोहिताश पाल उर्फ रोमी की हत्या 18 नवंबर 2025 की रात हुई थी. मामले में पुलिस ने जांच के दौरान कई आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की. इसी क्रम में मुकदमा संख्या 569/2025 थाना मुगलसराय में अभिषेक सिंह उर्फ पहलवान के खिलाफ न्यायालय ने उद्घोषणा की कार्रवाई की है. निर्धारित अवधि में न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होने पर उसके खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.
वहीं, धानापुर के चर्चित मुट्टून यादव हत्याकांड में भी अभिषेक सिंह उर्फ पहलवान पर पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. बाद में आरोपी ने न्यायालय से स्टे ले लिया. इसके बाद धानापुर पुलिस ने उसके घर पर तीन नोटिस चस्पा कर उसे हत्याकांड की विवेचना में सहयोग करने और आवश्यक कार्रवाई के लिए उपस्थित होने को कहा.
धानापुर पुलिस के अनुसार, नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अभिषेक सिंह उर्फ़ पहलवान ने विवेचना में अपेक्षित सहयोग नहीं किया. अब धानापुर पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी है. पुलिस शासन को पत्र भेजकर उसके स्टे को खारिज कराने की कार्रवाई कर रही है. इसके लिए आरोपी के विवेचना में सहयोग नहीं करने और न्यायालय से स्टे मिलने के बाद की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट तैयार की जा रही है.
दो चर्चित हत्याकांडों में नाम सामने आने और पुलिस की लगातार कार्रवाई के बीच अभिषेक सिंह उर्फ पहलवान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों में विवेचना नियमानुसार जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों व न्यायालय के आदेशों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.
नौ महीने बाद भी अधूरी है रोमी पाल हत्याकांड की कहानी, तीन आरोपी जेल से बाहर, शूटरों तक नहीं पहुंची पुलिस —
चंदौली—मुगलसराय के चर्चित दवा कारोबारी रोहिताश पाल उर्फ रोमी पाल हत्याकांड को नौ महीने पूरे हों गए. लेकिन वारदात के पीछे की पूरी साजिश और हत्या को अंजाम देने वालों का रहस्य अब भी कायम है. पुलिस ने जांच के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जमीन विवाद को हत्या की वजह बताया गया, लेकिन जिस शूटर ने कारोबारी की जान ली, वह अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है। ऐसे में परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हत्या की साजिश रचने वालों तक पहुंचने के बाद भी वारदात को अंजाम देने वाले हाथ कानून के शिकंजे से बाहर क्यों हैं.
18 नवंबर 2025 की रात हुई रोहिताश पाल की हत्या ने पूरे मुगलसराय क्षेत्र को झकझोर दिया था। प्रतिष्ठित दवा कारोबारी की हत्या के बाद व्यापारियों में आक्रोश फैल गया था. पुलिस पर जल्द खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ा. मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा और कई जनप्रतिनिधियों व नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर जल्द न्याय दिलाने का भरोसा दिया.
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने वाराणसी निवासी भानु जायसवाल और पीडीडीयू नगर निवासी मनोज जायसवाल व ओमप्रकाश जायसवाल को गिरफ्तार किया. पुलिस की ओर से हत्या के पीछे जमीन संबंधी विवाद और साजिश की बात सामने रखी गई. तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया, लेकिन अब तीनों जमानत पर बाहर हैं। दूसरी ओर, हत्या को अंजाम देने वाले शूटरों की गिरफ्तारी अभी भी इस मामले की सबसे बड़ी कड़ी बनी हुई है
सीसीटीवी में दिखा शूटर, फिर भी पहचान क्यों नहीं?
हत्याकांड की जांच में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य माना गया. वारदात के दौरान हुडी पहने एक संदिग्ध शूटर की तस्वीर कैमरों में कैद होने की बात सामने आई थी. इसके बावजूद नौ महीने बाद भी पुलिस उस व्यक्ति की पहचान और गिरफ्तारी नहीं कर सकी है. यही स्थिति अब जांच की दिशा और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रही है.
साजिशकर्ताओं तक पहुंची पुलिस तो शूटर क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुलिस की जांच में हत्या की साजिश रचने वाले लोगों तक पहुंच बन गई थी और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, तो हत्या के लिए शूटरों की व्यवस्था किसने की और उन्हें वारदात के बाद कहां छिपाया गया—इन सवालों का जवाब अब तक सामने क्यों नहीं आया.
यदि पुलिस के अनुसार हत्या की साजिश जमीन विवाद को लेकर रची गई थी, तो साजिश से लेकर हत्या को अंजाम देने तक की पूरी कड़ी का खुलासा होना अभी बाकी है। यही कड़ी इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
नौ महीने बाद परिवार को अब भी न्याय का इंतजार —
हत्याकांड के शुरुआती दिनों में व्यापारियों का आक्रोश और राजनीतिक दबाव साफ दिखाई दिया था. समय बीतने के साथ आंदोलन और सार्वजनिक दबाव जरूर कम हुआ, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए मामला खत्म नहीं हुआ है. परिवार आज भी यही उम्मीद लगाए बैठा है कि पुलिस हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश करेगी और वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करेगी.
रोहिताश पाल हत्याकांड में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी कहानी का सबसे अहम अध्याय अभी अधूरा है। सवाल अब भी वही है—जिसने गोली चलाई, वह कौन था और नौ महीने बाद भी पुलिस की पहुंच से बाहर क्यों है? परिवार को इसी सवाल के जवाब और न्याय का इंतजार है.











