बलिया— जिले के बांसडीह थाने पर तैनात एक दारोगा पर विवेचना के दौरान चार्जशीट दाखिल करने तथा मुकदमे की धाराओं को बरकरार रखने के नाम पर बैंक खाते में रिश्वत लेना भारी पड़ गया. साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक बलिया ओमवीर सिंह के निर्देश पर आरोपित उप-निरीक्षक रमाशंकर यादव को निलंबित कर दिया गया है.
वहीं इनके ही थाने में इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उपनिरीक्षक जौनपुर का मूल निवासी है जबकि वाराणसी में रहता है. आरोपी दारोगा रामाशंकर यादव चंदौली डायल 112 में हेड कांस्टेबल से प्रमोशन पाकर उप-निरीक्षक बना था. वर्तमान पोस्टिंग बांसडीहरोड थाने थी. बांसडीह रोड थाने में तैनात उपनिरीक्षक रमाशंकर यादव एक आपराधिक मुकदमे की विवेचना कर रहा था. आरोप है कि मुकदमे के वादी से धाराएं न हटाने और समय से चार्जशीट दाखिल करने के बदले अलग-अलग समय पर अपने बेटे के बैंक खाते में धनराशि ली. इसकी शिकायत के बाद उच्चाधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए जांच के आदेश दिए. जांच के दौरान विवेचक पर मुकदमे में लगी धाराओं को हटाने का दबाव बनाया जाने लगा. इसी बीच दरोगा द्वारा वादी से पैसे लिए जाने और बाद में धाराएं हटाए जाने के बाद कुछ धनराशि लौटाने का भी आरोप सामने आया.
इस पूरे घटनाक्रम से नाराज वादी ने उच्चाधिकारियों से शिकायत करते हुए बैंक खाते में पैसे भेजने का विवरण और बातचीत की रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य भी उपलब्ध कराए. जांच में आरोप सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक ने आरोपी एसआई को तत्काल निलंबित कर दिया.





