Chandauli Politics: राखी के धागे में बंधा ‘सियासी बहन प्रेम’! मनोज डब्लू से डॉ. केएन पांडेय और सुशील सिंह तक मैदान में उतरे नेता, 7 हजार राखियों ने बढ़ाई चुनावी हलचल
चंदौली—रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार चंदौली में सिर्फ भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व तक सीमित नहीं दिखा। जिले की सियासत में भी राखी के धागों के साथ ‘बहन प्रेम’ और राजनीतिक सक्रियता का रंग खूब नजर आया. सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेताओं ने बहनों के बीच पहुंचकर राखी बंधवाई और अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. अब सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की है कि आखिर यह सिर्फ रिश्तों की गर्माहट है या फिर आने वाले चुनाव की गर्म होती जमीन पर जनसंपर्क की नई रणनीति?
रक्षाबंधन के मौके पर सैयदराजा समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने बहनों से राखी बंधवाकर त्योहार मनाया. बड़ी संख्या में बहनों के बीच उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को भी हवा दी. समर्थकों की ओर से इसे भाई-बहन के स्नेह और सामाजिक सरोकार से जोड़कर देखा गया.
बहनों से राखी बंधवाते मनोज सिंह डब्लू —
इसके बाद मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरने के मूड में बताए जा रहे डॉ. केएन पांडेय ने भी रक्षाबंधन पर बहनों से राखी बंधवाई. उनकी सक्रियता को लेकर भी इलाके में सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म है। चुनावी संभावनाओं के बीच उनका इस तरह जनता के बीच पहुंचना कई राजनीतिक मायनों में देखा जा रहा है.
बहनों से राखी बंधवाते डॉ. KN पांडेय —
वहीं, सैयदराजा के मौजूदा विधायक सुशील सिंह ने भी रक्षाबंधन को बड़े स्तर पर मनाया। रविवार को आयोजित कार्यक्रम में करीब 7 हजार से अधिक बहनों से राखी बंधवाने की बात सामने आई. बड़ी संख्या में बहनों की मौजूदगी वाला यह आयोजन जिले की सियासत में चर्चा का विषय बन गया.
बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाते विधायक सुशील —
राखी के बहाने सियासी कनेक्शन?
रक्षाबंधन हर साल आता है और भाई-बहन का रिश्ता भी हर साल मजबूत होता है, लेकिन चुनावी माहौल की आहट के बीच नेताओं की बढ़ती सक्रियता को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है. बहनों से राखी बंधवाने के बहाने नेताओं का बड़े पैमाने पर जनता के बीच पहुंचना जनसंपर्क का मजबूत जरिया भी माना जा रहा है.
सवाल यह है कि क्या नेताओं का यह ‘बहन प्रेम’ सिर्फ त्योहार तक सीमित है या इसके पीछे आने वाले चुनाव का भी कोई सियासी संदेश छिपा है?
किसी ने राखी बंधवाई, किसी ने बनाया बड़ा आयोजन —
चंदौली की सियासत में इस बार रक्षाबंधन के अलग-अलग रंग दिखाई दिए. एक तरफ पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू बहनों के बीच पहुंचे, तो दूसरी तरफ डॉ. केएन पांडेय ने भी राखी के बहाने अपनी सक्रियता दिखाई. वहीं मौजूदा विधायक सुशील सिंह ने हजारों बहनों तक पहुंचकर बड़े आयोजन के जरिए अपनी राजनीतिक मौजूदगी का एहसास कराया.
यानी राखी एक थी, लेकिन सियासी अंदाज अलग-अलग…
चुनाव अभी दूर, लेकिन नेताओं की ‘तैयारी’ शुरू?
विधानसभा चुनाव अभी सामने नहीं है, लेकिन चंदौली की राजनीति में नेताओं की सक्रियता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है. त्योहारों और सामाजिक आयोजनों के जरिए जनता के बीच पहुंचना नेताओं की पुरानी रणनीति रही है. रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व पर महिलाओं और बहनों के बीच पहुंचकर राखी बंधवाना भी इसी जनसंपर्क राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, राजनीतिक दलों और संभावित दावेदारों की सक्रियता और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले दिनों में त्योहार, सामाजिक आयोजन और जनसंपर्क—तीनों के बीच सियासी समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं.
अब असली सवाल—राखी का रिश्ता या वोट का रिश्ता?
चंदौली की सियासत में इस बार राखी के धागे ने एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है. नेताओं ने बहनों से राखी बंधवाई, अपनत्व जताया और भाई-बहन के रिश्ते की दुहाई दी. लेकिन राजनीति में हर सार्वजनिक गतिविधि के अपने मायने भी निकाले जाते हैं.
अब देखने वाली बात यह होगी कि रक्षाबंधन पर दिखा यह ‘बहन प्रेम’ पूरे साल दिखाई देता है या फिर अगली राखी तक सियासी कैलेंडर में ही नजर आता है.
फिलहाल चंदौली में राखी के धागे तो दिख रहे हैं, लेकिन इनके पीछे सियासत की गांठ कितनी मजबूत है—इसका जवाब आने वाला चुनाव ही देगा।