Jai tiwari —
चंदौली/वाराणसी। नमो घाट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं रह गए हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बीच यह खुलासा चिंता बढ़ाने वाला है कि घाट और मंदिरों जैसे संवेदनशील स्थानों पर ऐसे “अनऑफिशियल” सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए गए थे, जिनका न तो पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था और न ही उनका कोई अधिकृत रिकॉर्ड तैयार किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक नमो घाट के संचालन और रखरखाव का ठेका दिल्ली की निजी कंपनी रॉबर्ट्स ग्रुप्स को सात वर्षों के लिए दिया गया था, जिसकी अवधि वर्ष 2027 तक बताई जा रही है। कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा आगे स्थानीय एजेंसियों को सौंप दिया। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में कई ऐसे गार्ड तैनात कर दिए गए जो न तो अधिकृत सूची में शामिल थे और न ही उनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यही व्यवस्था मुगलसराय और चंदौली में भी चल रही है। पड़ाव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क, बड़े शोरूम, आईपी मॉल, आभूषण प्रतिष्ठान और निजी स्कूलों, इंडस्ट्रीज एरिया के फैक्ट्री में तैनात कई प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कई संस्थानों में बिना प्रशिक्षण और बिना वैध वेरिफिकेशन के सुरक्षा कर्मियों से ड्यूटी ली जा रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी के संचालन के लिए लाइसेंस, गार्ड्स की निर्धारित ट्रेनिंग, पहचान पत्र और पुलिस सत्यापन अनिवार्य होता है। इसके बावजूद यदि नियमों को दरकिनार कर संवेदनशील स्थलों पर अनधिकृत लोगों को तैनात किया जा रहा है, तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक भी मानी जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन ऐसे संस्थानों और एजेंसियों की जांच करेगा जो सुरक्षा के नाम पर बिना मानकों के गार्ड तैनात कर रहे हैं, या फिर यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।









