विशेष संवाददाता —
वाराणसी—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के सरकारी काफिलों में चलने वाली गाड़ियों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने की अपील के बाद उत्तर प्रदेश में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री योगी ने इस निर्देश को सख्ती से लागू करने की बात कही है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल पूर्वांचल की राजनीति और बाहुबलियों की उस संस्कृति पर खड़ा हो रहा है, जहां लंबे काफिले को प्रभाव और पहचान से जोड़ कर देखा जाता है। पूर्वांचल में वर्षों से बाहुबलियों और प्रभावशाली नेताओं की पहचान उनके दर्जनों गाड़ियों वाले काफिले, वीआईपी नंबर प्लेट, लग्जरी एसयूवी, हूटर और जेड ब्लैक शीशे से होती है। सड़क पर सायरन बजाते हुए निकलते इन काफिलों को देखकर आम लोग रास्ता बदल लेते हैं। कई मामलों में इन गाड़ियों पर काली फिल्म, हूटर और नियमों के विपरीत सुविधाएं होने के आरोप भी लगते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के मामले कम ही देखने को मिले हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्वांचल के कई प्रभावशाली चेहरे, जो कभी बाहुबली छवि के लिए चर्चित रहे, आज सत्ता और संगठन से जुड़े हैं। इनमें सबसे ऊपर बृजेश सिंह, सुशील सिंह, विनित सिंह के परिवार के लोगों का नाम है। वहीं पूर्व सांसद धनंजय सिंह और अभय सिंह सिंह भी किसी से कम नहीं हैं। कुछ प्रभावशाली परिवारों के सदस्य आज भी दो दर्जन से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ चलते दिखाई देते हैं, भले ही उनके पुराने राजनीतिक या आपराधिक अध्याय अब इतिहास बन चुके हों। इनके अलावा कई नए और पुराने रसूखदार भी पूर्वांचल की सड़कों पर लंबे काफिले के साथ चलते हैं। जिनका जुड़ाव सत्ता पक्ष से है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम और सीएम का संदेश केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शक्ति प्रदर्शन और वीआईपी कल्चर पर भी एक संकेत माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पूर्वांचल के प्रभावशाली बाहुबली और राजनीतिक चेहरे भी अपने लंबे काफिलों को सीमित करेंगे या फिर यह परंपरा पहले की तरह जारी रहेगी।
आम वाहनों पर सख्ती, रसूखदार काफिलों पर खामोशी?
पूर्वांचल में लंबे वीआईपी काफिलों और रसूखदारों की गाड़ियों को लेकर आम लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस आम नागरिकों की गाड़ियों की नियमित जांच करती है, लेकिन प्रभावशाली लोगों के काफिलों में चलने वाली गाड़ियों पर शायद ही कभी कार्रवाई दिखाई देती है। वहीं कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि कई वीआईपी गाड़ियों में नियमों के विपरीत काली फिल्म, हूटर और बिना मानक के नंबर प्लेट तक इस्तेमाल होते हैं, लेकिन पुलिस जांच के दौरान इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही वजह है कि अब लोग सरकार के वीआईपी संस्कृति खत्म करने के अभियान को लेकर समान चाहते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि नियम सभी के लिए बराबर हैं तो कार्रवाई भी बिना भेदभाव के होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि रसूखदार काफिलों पर सख्ती होने से सड़क पर शक्ति प्रदर्शन की संस्कृति पर भी अंकुश लगेगा।
पूर्वांचल में बाहुबलियों और रसूखदारों के काफिलों में अक्सर दिखाई देने वाली लग्जरी और हाई-प्रोफाइल गाड़ियों में प्रमुख रूप से ये वाहन शामिल रहते हैं —
डिफेंडर
टोयोटा लैंड क्रूजर
मर्सिडीज बेंज जीएलएस
बीएमडब्ल्यू एक्स7
ऑडी क्यू7
टोयोटा फॉर्च्यूनर
महिंद्रा स्कॉर्पियो
फोर्ड एंडेवर
महिंद्रा थार
एमजी ग्लॉस्टर
किया कार्निवल











