चंदौली। जनपद में बिना मान्यता संचालित निजी विद्यालयों के खिलाफ प्रशासनिक छापेमारी के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। कार्रवाई के बाद जहां एक ओर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में चहलकदमी बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर कई चिन्हित विद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया जारी रहने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे विभागीय कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में बिना मान्यता पाए गए विद्यालयों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संचालकों द्वारा प्रवेश प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर असमंजस में हैं, वहीं कई लोग विभागीय उदासीनता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
बेचूपुर निवासी अभिभावक राकेश यादव ने बताया कि बच्चों के एडमिशन के नाम पर 8 से 10 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है, जिसमें कॉपी-किताब और अन्य शुल्क शामिल हैं। वहीं, मुगलसराय के शाहिद अली का कहना है कि अगर स्कूल की मान्यता ही नहीं है तो वहां पढ़ाई कराने का क्या औचित्य है, लेकिन स्पष्ट सूचना न होने से लोग गुमराह हो रहे हैं।
इसी तरह, जलीलपुर क्षेत्र के सुनील कुमार ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि ऐसे स्कूलों के बाहर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगवाए, ताकि अभिभावकों को सही जानकारी मिल सके। वहीं, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अजय सिंह का मानना है कि कार्रवाई के बाद भी अगर दाखिले जारी हैं तो यह जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन विद्यालयों के पास मान्यता नहीं है, उनके बाहर यह विद्यालय मान्यता प्राप्त नहीं है का बोर्ड अब तक क्यों नहीं लगाया गया। इससे आम लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है और अभिभावक अनजाने में अपने बच्चों का भविष्य जोखिम में डाल रहे हैं।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में सख्ती के संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कितना दिखेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
चंदौली में बिना मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई के बाद भी चल रही प्रवेश प्रक्रिया, बीएसए कार्यालय में बढ़ी हलचल, अभिभावकों में नाराजगी
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