‘चाँदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए तो क्या हुआ, अगली पीढ़ी की किस्मत तो लिख सकते हैं’—ईमानदारी, बचत और अनुशासित निवेश को बताया संपत्ति निर्माण का आधार
चंदौली—दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस अवसर पर लेखक एवं शिक्षाविद् डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने आर्थिक जीवन से जुड़ी दस ऐसी बुराइयों को पहचानने और उनसे छुटकारा पाने का संदेश दिया है, जो व्यक्ति को संपत्ति बनाने और अगली पीढ़ी का भविष्य मजबूत करने से रोकती हैं. उन्होंने अपने लेख में कहा है कि जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति टाटा, बिड़ला या अंबानी के घर पैदा हो, लेकिन सही आर्थिक फैसलों से आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शुरुआत जरूर तैयार की जा सकती है.
डॉ. तिवारी ने ‘चाँदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए तो क्या हुआ? अगली पीढ़ी की किस्मत तो लिख सकते हैं!’ शीर्षक से लिखे लेख में आर्थिक मजबूती के लिए टालमटोल, दिखावा, लालच, डर, अज्ञान का अहंकार, भेड़चाल, अधैर्य, अनुशासनहीनता, गैरजरूरी कर्ज और बेईमानी को दस बड़ी बाधाएं बताया है.
उन्होंने कहा कि बहुत से लोग नौकरी लगने, शादी होने, बच्चों की फीस निकलने या तनख्वाह बढ़ने के बाद निवेश शुरू करने की सोचते रहते हैं। जबकि जीवन में खर्च कभी खत्म नहीं होते. इसलिए अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार छोटी शुरुआत करना जरूरी है। बीता हुआ समय वापस नहीं आता और संपत्ति बनाने में नियमितता की अहम भूमिका होती है.
लेख में दिखावे की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं. महंगे फोन, बड़ी गाड़ी और शानदार पार्टियों के लिए खर्च करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कहीं इन इच्छाओं के कारण बच्चों की पढ़ाई, बचत और आपातकालीन जरूरतों के लिए पैसे की कमी तो नहीं हो रही. उन्होंने कहा कि वास्तविक आर्थिक मजबूती वह है, जो मुश्किल समय में परिवार के काम आए.
डॉ. तिवारी ने जल्द पैसा दोगुना करने के लालच और निवेश में नुकसान के डर से बचने की सलाह देते हुए कहा कि किसी भी निवेश से पहले उसके जोखिम, संभावित रिटर्न और शर्तों को समझना जरूरी है. दूसरों को देखकर निवेश करने के बजाय अपने आर्थिक लक्ष्य, जिम्मेदारियों और जोखिम सहने की क्षमता के आधार पर निर्णय लेना चाहिए. निवेश के मामले में जानकारी हासिल करना और जरूरत पड़ने पर योग्य पेशेवर की मदद लेना भी महत्वपूर्ण है.
उन्होंने अनुशासित निवेश पर जोर देते हुए कहा कि महीने के अंत में बचने वाले पैसे का इंतजार करने के बजाय बजट बनाकर बचत और निवेश के लिए पहले से रकम निर्धारित करनी चाहिए. साथ ही आपातकालीन बचत, जरूरी बीमा, कर्ज के भुगतान और भविष्य के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए. गैरजरूरी खर्चों के लिए महंगा कर्ज लेने से भी बचना चाहिए.
लेख में बेईमानी से अर्जित संपत्ति को आर्थिक सफलता मानने की सोच पर भी प्रहार किया गया है। डॉ. तिवारी के अनुसार, अगली पीढ़ी को विरासत में केवल बैंक बैलेंस या संपत्ति ही नहीं मिलती, बल्कि परिवार का नाम, संस्कार, रिश्ते और कर्मों का प्रभाव भी मिलता है. इसलिए संपत्ति का निर्माण ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए.
परिवार के भविष्य के लिए आर्थिक संकल्प लेने की अपील —
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने दशहरे पर लोगों से अपनी कमाई और खर्च का हिसाब रखने, गैरजरूरी कर्ज की पहचान करने, आपातकालीन जरूरतों की तैयारी करने और बच्चों की शिक्षा सहित सेवानिवृत्ति जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए योजनाबद्ध निवेश करने की अपील की है. उन्होंने परिवार के सदस्यों को जरूरी वित्तीय दस्तावेजों और निवेश की जानकारी देने तथा बच्चों को पैसे कमाने और सँभालने की समझ विकसित कराने पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा कि अमीर बनना केवल इच्छाशक्ति पर निर्भर नहीं करता. आय, अवसर, पारिवारिक जिम्मेदारियां और परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं। इसके बावजूद अपनी परिस्थितियों के भीतर बेहतर आर्थिक आदतें अपनाकर भविष्य को मजबूत बनाया जा सकता है.
डॉ. तिवारी, LTP Calculator Fintech Pvt Ltd के संस्थापक तथा Daddy’s International School के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक हैं. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हर पीढ़ी को बड़ी संपत्ति विरासत में नहीं मिलती, लेकिन सही फैसलों से अगली पीढ़ी के लिए मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया जा सकता है.
उनका संदेश स्पष्ट है कि संपत्ति बनाना केवल पैसा जोड़ना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को आर्थिक मजबूरी से मुक्त होकर अपने फैसले लेने के बेहतर अवसर देना है. इस दशहरे बुराइयों के प्रतीक रावण के साथ आर्थिक जीवन की उन आदतों को भी हराने का संकल्प लेना चाहिए, जो परिवार की तरक्की में बाधा बनती हैं.
— डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
नोट: लेख में व्यक्त विचार सामान्य वित्तीय जागरूकता के उद्देश्य से हैं। यह व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं है। निवेश में जोखिम होता है और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती.









