चंदौली— शहर में दिन का उजाला था… लेकिन इस कथित गिरोह की नजर घरों के सामान पर नहीं, बंद दरवाजों पर थी. कौन सा मकान कई दिनों से बंद है? किस घर में रात के समय सन्नाटा रहता है? किस रास्ते से आसानी से अंदर दाखिल हुआ जा सकता है? पुलिस के मुताबिक, इन सवालों के जवाब दिन में ही तलाश लिए जाते थे और फिर शुरू होती थी रात की तैयारी.

फिर रात होती थी…
चिन्हित मकान से कुछ दूरी पर कार या ऑटो खड़ा होता. गिरोह के सदस्य उतरते. ताला टूटता या छत के रास्ते घर में दाखिल होते और कुछ ही देर में नकदी, जेवर और कीमती सामान लेकर निकल जाते.
लेकिन चोरी की कहानी यहीं खत्म नहीं होती थी….
चोरी के जेवर कथित तौर पर सीधे सोनार तक पहुंचते थे. वहां जेवर गलाए जाते, बेचे जाते और उसके बाद रकम गिरोह के सदस्यों के बीच बांट दी जाती थी.
मुगलसराय पुलिस ने अब इसी कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है. बुधवार अपराह्न 3:30 चंदौली पुलिस लाइन सभागार में अपर पुलिस अधीक्षक सदर अनंत चंद्रशेखर ने प्रेसवार्ता कर इस सनसनीखेज मामले की जानकारी दी. पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से 3 लाख 50 हज़ार नकद, दो डेल कंपनी के लैपटॉप, सोनी कंपनी की एलईडी टीवी, इंडेन गैस सिलेंडर, चांदी की पायल, मीना, सोने की अंगूठी और कान की बाली बरामद की गई. वारदात में इस्तेमाल बताई गई लग्जरी वेन्यू कार और ऑटो को भी पुलिस ने कब्जे में लिया है.
एक मुखबिर की सूचना ने खोल दी पूरी कहानी —
16 सितंबर की तड़के मुगलसराय पुलिस की टीम वीआईपी गेट के पास मौजूद थी. क्षेत्र में हुई चोरी की घटनाओं और सक्रिय चोरों को लेकर पुलिसकर्मी आपस में बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान एक मुखबिर पहुंचा. सूचना थी कि इंडियन इंस्टीट्यूट नाचघर के पास एक सफेद वेन्यू कार और एक ऑटो संदिग्ध हालत में खड़े हैं. उनके आसपास सात-आठ लोग मौजूद हैं और चोरी के माल के बंटवारे को लेकर बातचीत कर रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई. पुलिस भी यह मौका गवाना नहीं चाहती थी. तुरंत मौके की घेराबंदी की और चारों तरफ से दबिश देकर वहां मौजूद लोगों को पकड़ लिया गया. यही वह पल था, जहां एक संदिग्ध जमावड़ा पुलिस के सामने कई चोरी की घटनाओं की कथित कहानी में बदल गया.
पूछताछ में खुला रेकी से चोरी तक का कथित फॉर्मूला —
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह पहले दिन में बंद मकानों की रेकी करता था. रात में उसी मकान को निशाना बनाया जाता था. पुलिस के मुताबिक विशाल भारती चोरी की योजना बनाने में भूमिका निभाता था. वहीं प्रशांत सोनी उर्फ बाबू सेठ की वेन्यू कार और दीपक जायसवाल उर्फ रवीन्द्र कुमार जायसवाल की ऑटो का इस्तेमाल वारदातों में किया जाता था. वाहन को मकान से कुछ दूरी पर खड़ा किया जाता और फिर गिरोह के सदस्य पैदल आगे बढ़ते थे. कहीं ताला तोड़ा जाता तो कहीं छत के रास्ते घर में दाखिल होने की बात सामने आई. अंदर पहुंचने के बाद निशाना होता था—नकदी, जेवर और ऐसा सामान जिसे आसानी से उठाकर ले जाया जा सके.
यहीं से इस कथित नेटवर्क की पहली कड़ी जुड़ती थी—
रेकी —मकान की पहचान—रात में पहुंचना—चोरी
लेकिन इसके बाद दूसरी कड़ी शुरू होती थी…
चोरी का माल और शुरू होता था ‘दूसरा खेल’
पुलिस के अनुसार चोरी के बाद माल को आपस में बांटा जाता था. नकदी का हिस्सा अलग और सोने-चांदी के जेवर अलग. पुलिस के मुताबिक चोरी के आभूषणों को तुषार वर्मा तक पहुंचाया जाता था, जो मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के मस्त लाज गली के अंदर ज्वेलरी का कारोबार करता था. पुलिस के अनुसार पूछताछ में तुषार ने कथित तौर पर बताया कि गिरोह के लोग चोरी का सोना-चांदी उसके पास लाते थे. आरोप है कि जेवरों को गलाकर बेचने के बाद वह अपना हिस्सा रखता और बाकी रकम गिरोह के सदस्यों को दे देता था.
पुलिस ने कार खोली तो निकला चोरी का माल —
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मौके पर खड़ी वेन्यू कार संख्या UP67AB8628 की तलाशी ली. कार से दो डेल कंपनी के लैपटॉप बरामद हुए. पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने एक लैपटॉप को 1 अगस्त 2026 को इंडियन इंस्टीट्यूट रेलवे कॉलोनी और दूसरे को 20 अगस्त 2026 को न्यू सेंट्रल कॉलोनी में हुई चोरी से संबंधित बताया.
लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी—
लैपटॉप के बैग की तलाशी ली गई तो उसमें पीली पन्नी के अंदर दो जोड़ी चांदी की पायल, तीन मीना चांदी, एक सोने की अंगूठी और एक सोने की कान की बाली मिली. अब पुलिस के सामने चोरी की घटनाओं को बरामद सामान से जोड़ने के लिए एक और महत्वपूर्ण कड़ी थी.
आरपीएफ कॉलोनी का सामान खंडहर में छिपा था —
पूछताछ के दौरान आरपीएफ कॉलोनी में हुई चोरी का जिक्र आया. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि वहां से चोरी किया गया सोनी कंपनी का टीवी और इंडेन गैस सिलेंडर जीटीआर ब्रिज के उत्तर तरफ स्थित एक पुराने खंडहरनुमा मकान में छिपाकर रखा गया है.
पुलिस टीम आरोपियों को साथ लेकर मौके पर पहुंची—
तलाशी के दौरान खंडहरनुमा मकान से सोनी की एलईडी टीवी और इंडेन गैस सिलेंडर बरामद होने का दावा किया गया. यानी पुलिस की कार्रवाई में सिर्फ कथित चोरी की रकम ही नहीं, बल्कि अलग-अलग घटनाओं में चोरी हुआ सामान भी सामने आने लगा.
जेबों से निकलती गई रकम, जुड़ती गई चोरी की कड़ियां, इसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की अलग-अलग तलाशी ली गई. पुलिस के मुताबिक—
प्रशांत सोनी उर्फ बाबू सेठ — 50 हजार
विशाल भारती — 50 हजार
रहमान उर्फ आंखी — 30 हजार
राजेश सिंह — 30 हजार
अनिल गुप्ता — 30 हजार
दीपक जायसवाल उर्फ रवीन्द्र कुमार जायसवाल — 30 हजार
तुषार वर्मा — 1 लाख
लकी जायसवाल — 30 हजार
इस तरह पुलिस के अनुसार कुल 3.50 लाख नकद बरामद हुआ.
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने इस रकम को अलग-अलग चोरी की घटनाओं से मिले अपने कथित हिस्से की बची रकम बताया.
एक चोरी नहीं… कई घटनाओं तक पहुंची कहानी
अब पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण कड़ी थी—यह रकम और बरामद सामान आखिर किन-किन घटनाओं से जुड़ा है? पुलिस के अनुसार पूछताछ और बरामदगी की कड़ियां मुगलसराय, चंदौली और बलुआ थाना क्षेत्रों में दर्ज कई मुकदमों तक पहुंचीं. इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट रेलवे कॉलोनी, न्यू सेंट्रल कॉलोनी, आरपीएफ कॉलोनी, सिद्धार्थपुरम कॉलोनी, चकिया बिहारी मिश्र गांव, सेमरा गांव और मांटी गांव में हुई चोरी की घटनाएं शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक इन मामलों में बरामदगी के आधार पर धारा 317(2)/317(4) बीएनएस की बढ़ोतरी करते हुए आरोपियों के नाम प्रकाश में लाने की कार्रवाई की गई है.
चोरी की कमाई सिर्फ बांटी नहीं गई, खर्च भी हुई —
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में प्रशांत सोनी ने कथित तौर पर चोरी के आभूषणों की बिक्री से मिली रकम के इस्तेमाल की भी जानकारी दी. पुलिस का दावा है कि इस रकम से सेकेंड हैंड कार खरीदी गई, कुछ पैसे से जेवर खरीदकर उन्हें गिरवी रखकर लोन लिया गया और कुछ रकम से चंधासी, मुगलसराय में पत्नी के नाम प्लॉट खरीदा गया. अन्य आरोपियों के बारे में पुलिस का कहना है कि उन्होंने भी अपने हिस्से की रकम निजी जरूरतों में खर्च करने की बात बताई इन दावों और संपत्ति/लेन-देन से जुड़े तथ्यों का सत्यापन पुलिस जांच का हिस्सा है.
जिस रात चोरी का माल बांट रहे थे, उसी रात पुलिस पहुंच गई, पूरी कहानी का सबसे अहम मोड़ यही था—
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य पुराने चोरी के माल का कथित बंटवारा करने के लिए एक जगह जुटे थे. साथ ही आगे के लिए बंद मकानों की रेकी और चोरी की योजना पर भी बातचीत हो रही थी. उन्हें शायद अंदाजा नहीं था कि पुलिस को उनकी मौजूदगी की भनक लग चुकी है. मुखबिर की सूचना आई… पुलिस टीम पहुंची… घेराबंदी हुई… और कथित चोरी नेटवर्क के आठ सदस्य एक साथ पुलिस की गिरफ्त में आ गए. अगर पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो यह जमावड़ा खत्म हो जाता और आरोपी अलग-अलग निकल सकते थे. लेकिन इस बार कहानी उलट गई. चोरी का माल बांटने बैठे लोग खुद पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बन गए।
इस कार्रवाई में खुली कथित पूरी चेन —
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात सिर्फ 8 गिरफ्तारियां या 3.50 लाख की बरामदगी नहीं है. पुलिस के दावे के मुताबिक इस कार्रवाई में कथित नेटवर्क की कई कड़ियां एक साथ सामने आईं—यानी पुलिस की कहानी में रेकी से शुरू हुआ खेल सोनार तक पहुंचता था और फिर नकदी के बंटवारे पर खत्म होता था.
पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी और बरामदगी की पूरी कार्रवाई ई-साक्ष्य के माध्यम से वीडियोग्राफ की गई है. बरामद नकदी, जेवर और अन्य सामान को नियमानुसार सील कर संबंधित मुकदमों में दाखिल किया गया है. अब मुगलसराय और आसपास की जिन चोरी की घटनाओं में बंद मकान, टूटे ताले और गायब सामान की कहानी दर्ज थी, उनकी कड़ियां पुलिस के इस खुलासे के बाद एक-दूसरे से जुड़ती नजर आ रही हैं. पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामदगी के आधार पर इन घटनाओं का संबंध इसी कथित नेटवर्क से सामने आया है.गिरफ्तारी व बरामदगी करने वाली पुलिस टीम-
गिरफ्तारी व बरामदगी करने वाली पुलिस टीम-
थानाध्यक्ष अर्जुन सिंह, थाना मुगलसराय, चन्दौली
उप-नि0 शिवपूजन बिन्द, चौकी प्रभारी रेलवे कालोनी, थाना मुगलसराय
उ०नि० सतीश प्रकाश, चौकी प्रभारी कस्बा, थाना मुगलसराय
उ0नि0 विजय राज, चौकी प्रभारी शिवाला, थाना मुगलसराय
उ०नि० सुभाष प्रसाद, थाना मुगलसराय
उ0नि0 त्रिवेणी प्रसाद, थाना मुगलसराय
हे०का० भोला यादव, थाना मुगलसराय
हे०का० संदीप सिंह, थाना मुगलसराय
का० दीपक मिश्रा, थाना मुगलसराय
का) अमित यादव, थाना मुगलसराय
का० अभिषेक यादव, थाना मुगलसराय
का० सन्तोष कुमार, थाना मुगलसराय
का० विकास यादव, थाना मुगलसराय
का० मोहित यादव, थाना मुगलसराय
रि०का० नीरज वर्मा, थाना मुगलसराय
स्वाट सर्विलांस—
नि० राम जन्म यादव
उ०नि० आशीष मिश्रा
हे०का० अरविंद भारद्वाज
हे०का० राणा प्रताप सिंह
हे०का० रामानंद यादव
हे०का० आशुतोष सिंह
हे०का० सतीश पटेल
हे०का० आदित्य पाण्डेय
हे०का) प्रेम प्रकाश यादव
हे0का0 मन्टू सिंह
का० अजीत कुमार सिंह
का० अमित सिंह
का० महेश यादव
का) गणेश तिवारी
का० मनीष कुमार
का० मनोज यादव
का) संदीप कुमार










