सकलडीहा—चंदौली में देर रात तस्करों के एक संदिग्ध कंटेनर को पकड़ने के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी. सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के रतनपुर गांव के समीप कंटेनर चालक ने पुलिस की गाड़ी को टक्कर मार दी और मौके से भाग निकला. इसके बाद जिले में नाकेबंदी शुरू हुई और कई थानों की पुलिस उसे पकड़ने में जुट गई. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस की तैयारियों, वाहन संचालन और ड्यूटी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
तस्करों की सूचना पर निकली पुलिस, सामने आया जोखिम भरा घटनाक्रम —
जानकारी के मुताबिक, सकलडीहा कोतवाली प्रभारी भूपेंद्र निषाद के सीयूजी नंबर पर सूचना मिली कि शराब या गांजे से लदा एक कंटेनर सकलडीहा की तरफ से गुजरने वाला है. सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए रतनपुर गांव के समीप पहुंची.
आरोप है कि पुलिस को देखकर कंटेनर चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारते हुए चंदौली की तरफ भागने लगा. घटना के बाद कंट्रोल रूम को सूचना दी गई. इसके बाद सदर कोतवाली पुलिस समेत अन्य पुलिसकर्मी भी संदिग्ध कंटेनर को रोकने के प्रयास में जुट गए.
बताया जाता है कि रास्ते में बैरियर लगाकर वाहन को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन चालक बैरियर को टक्कर मारते हुए आगे निकल गया. इस दौरान पुलिस के सामने चुनौती लगातार बढ़ती गई. बाद में नौबतपुर के पास घेराबंदी के दौरान कंटेनर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया.
पुलिस की गाड़ी कौन चला रहा था? ड्यूटी व्यवस्था पर सवाल —
इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस वाहन के चालक को लेकर है. सूत्रों के अनुसार, सकलडीहा कोतवाली की फर्स्ट मोबाइल गाड़ी आनंद कुमार यादव चला रहे थे, जो कोतवाली के सीसीटीएनएस कार्यालय में मुंशी के पद पर तैनात बताए जाते हैं. उनके स्थान पर वाहन चलाने की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई थी और क्या वह इस ड्यूटी के लिए अधिकृत एवं प्रशिक्षित थे, यह जांच का विषय है.
वहीं, परिवहन शाखा से सकलडीहा कोतवाली में चालक बच्चा सिंह की तैनाती होने की बात सामने आई है. ऐसे में सवाल उठता है कि घटना के समय निर्धारित चालक कहां थे और पुलिस वाहन की कमान दूसरे कर्मचारी के हाथ में क्यों थी?
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि चालक बच्चा सिंह देर रात थाने से अनुपस्थित रहते हैं और वाराणसी स्थित अपने कमरे पर चले जाते हैं. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है. यदि ऐसा है, तो यह भी जांच का विषय है कि संबंधित कर्मचारी की ड्यूटी और उपस्थिति की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी.
शराब या गांजे की सूचना, लेकिन कंटेनर में मिले कंबल!
कंटेनर चालक के फरार होने के बाद वाहन को लेकर पुलिस की कार्रवाई भी चर्चा का विषय बन गई. बताया जाता है कि कंटेनर में शराब होने की आशंका के आधार पर उसे सदर कोतवाली लाया गया. हालांकि, सुबह जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें कंबल लदे होने की बात सामने आई. शराब या गांजा बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई.
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कंटेनर को लेकर मिली सूचना कितनी सटीक थी? क्या पुलिस को गलत सूचना दी गई थी, या वाहन के भीतर किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि की आशंका थी? कंटेनर चालक पुलिस को देखकर भागा क्यों और पुलिस की गाड़ी को टक्कर मारने के पीछे उसकी मंशा क्या थी? इन सवालों का जवाब विस्तृत जांच के बाद ही मिल सकेगा.
गुडवर्क की जल्दबाजी या सूचना की गंभीरता? जांच से खुलेगी पूरी कहानी —
पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई बिंदुओं पर जांच की जरूरत दिखाई देती है. एक ओर संदिग्ध कंटेनर को रोकने के लिए देर रात पुलिस टीम सड़क पर उतरी, वहीं दूसरी ओर वाहन संचालन, कर्मचारियों की तैनाती और घेराबंदी की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं.
यदि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ, तो भविष्य में ऐसी चूक गंभीर हादसे का कारण बन सकती है. यह भी जांचना जरूरी है कि क्या मौके पर पर्याप्त प्रशिक्षित पुलिसकर्मी मौजूद थे, वाहन चलाने वाले कर्मचारी को इस जिम्मेदारी के लिए अधिकृत किया गया था या नहीं और संबंधित चालक की अनुपस्थिति की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई.
कंटेनर में प्रतिबंधित सामग्री मिलने की पुष्टि नहीं होने के बावजूद पूरे घटनाक्रम को केवल तस्करी की कार्रवाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा. कंटेनर चालक के भागने, पुलिस वाहन को टक्कर मारने, बैरियर तोड़ने और बाद में वाहन छोड़कर फरार होने की परिस्थितियों की भी पड़ताल होनी चाहिए.
बड़ा हादसा टला, अब जवाबदेही तय करने की जरूरत —
सकलडीहा की इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि अपराधियों को पकड़ने की कार्रवाई में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है. यदि शुरुआती सूचना गलत थी, तो उसकी विश्वसनीयता की जांच होनी चाहिए. यदि सूचना सही थी, तो कंटेनर को रोकने के लिए अपनाई गई रणनीति और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा जरूरी है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होगी? पुलिस वाहन किसके आदेश पर आनंद कुमार यादव चला रहे थे, निर्धारित चालक बच्चा सिंह की ड्यूटी कहां थी, कंटेनर में केवल कंबल मिलने के बावजूद चालक ने पुलिस से बचकर भागने की कोशिश क्यों की और इस दौरान सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी है.
मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम में कहां चूक हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई. इसका उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकना और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए.









