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चंदौली में नन्हे हाथों से बनी ईट बेचकर करोड़पति बन रहे भट्ठा मालिक: भट्टे पर धड़ल्ले से हो रही बाल मजदूरी, एक तरफ सिस्टम का नाकारापन तो दूसरी ओर बाल मजदूरी का सच, पढ़े P-7 न्यूज‌ की खास रिपोर्ट…

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Published on: 21 February 2026, 6:35 am IST
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रिपोर्ट -जय प्रकाश तिवारी (jai tiwari)

चंदौली—किताबों और स्कूल की जगह ईंटों का बोझ… यह तस्वीर किसी दूर-दराज इलाके की नहीं, बल्कि चंदौली जनपद के मुगलसराय क्षेत्र के रौना गांव की है. यहां ईंट भट्ठों पर मासूम बच्चे खुलेआम मजदूरी करते नजर आ रहे हैं. पढ़ाई की उम्र में ये बच्चे दिनभर ईंट उठाने और ढोने को मजबूर हैं. यह नजारा न सिर्फ सरकारी दावों की पोल खोलता है, बल्कि संबंधित विभागों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. इस गंभीर मामले को P7 न्यूज ने अपने एक्सक्लूसिव वीडियो के माध्यम से सामने लाया है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह छोटे-छोटे बच्चे ईंट भट्ठों पर काम कर रहे हैं. धूप, धूल और भारी मेहनत के बीच इन मासूमों का बचपन दम तोड़ता नजर आ रहा है. यह वीडियो सामने आने के बाद भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी हैरान करने वाली है.

नन्हे हाथों से ईट उतारते मासूम

एक-दो नहीं, दर्जन भर से अधिक भट्ठों पर बाल श्रम —

स्थानीय सूत्रों के अनुसार चंदौली जनपद में एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक ईंट भट्ठों पर बच्चों से काम कराया जा रहा है. लगभग हर भट्ठे पर यही स्थिति देखने को मिलती है. बावजूद इसके श्रम विभाग, बाल कल्याण समिति और अन्य संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. बाल श्रम निषेध कानून के बावजूद यह अवैध धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है.

सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित —

सरकार की ओर से शिक्षा, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति और बाल संरक्षण से जुड़ी तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. रौना गांव समेत आसपास के इलाकों में बच्चे स्कूल जाने के बजाय ईंट भट्ठों पर काम करते दिख रहे हैं. सवाल यह है कि जब योजनाएं मौजूद हैं, तो इन बच्चों तक उनका लाभ क्यों नहीं पहुंच पा रहा?

कौन है जिम्मेदार?

बाल मजदूरी जैसे गंभीर अपराध पर प्रशासनिक अनदेखी कई सवाल खड़े करती है. क्या श्रम विभाग की नियमित जांच नहीं होती? क्या भट्ठा संचालकों पर कोई दबाव नहीं है? या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? P7 न्यूज़ द्वारा उजागर किए गए इस मामले ने सिस्टम की संवेदनहीनता को सामने ला दिया है. इस मामले पर स्थानीय सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि ईंट भट्ठों पर तत्काल छापेमारी कर बच्चों को मुक्त कराया जाए, भट्ठा संचालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और इन बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ा जाए. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह मासूम पीढ़ी मजदूरी के दलदल में हमेशा के लिए फंस जाएगी.

एसडीएम ने कहीं कार्रवाई की बात —

तहसील इलाके के ईंट भट्ठों पर मासूम बच्चे खुलेआम मजदूरी और मानक के अनुरूप चल रहे ईट भट्टे के मामले पर मुगलसराय एसडीएम अनुपम मिश्रा ने कार्रवाई की बात कही है. उन्होंने कहा है कि अगर इस तरीके से मासूमों से बाल मजदूरी कराई जा रही है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी.

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