चंदौली—इस वर्ष होली पर्व ग्रहण और भद्रा के विशेष संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण की तिथियों व समय को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है। श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर के व्यास व कथावाचक रामनाथ गिरी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 2 मार्च 2026 दिन सोमवार को भद्रा प्रातः 5:19 बजे तक प्रभावी रहेगी। उन्होंने बताया कि भद्रा समाप्ति के बाद ही होलिका दहन का शुभ समय प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से सायं 6:55 बजे से रात्रि 9:00 बजे के बीच होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। कुछ परंपराओं में रात्रि 11:30 बजे से 2:30 बजे तक का विशेष काल भी मान्य माना गया है। होलिका दहन के अगले दिन 4 मार्च 2026 को रंगों की होली पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। शहर के विभिन्न मोहल्लों और मंदिरों में पारंपरिक ढंग से होली मिलन समारोह आयोजित किए जाएंगे। पुजारी मुन्ना गुरु जी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ज्योतिषीय गणना के अनुसार निर्धारित समय में ही पूजन और दहन करें, ताकि धार्मिक परंपराओं का पूर्ण पालन हो सके।
इस वर्ष ग्रहण और भद्रा के संयोग के कारण होली का पर्व धार्मिक दृष्टि से और भी विशेष माना जा रहा है।
चंद्र ग्रहण का समय और सूतक-
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 3 मार्च को प्रातः 3:30 बजे से 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। ग्रहण का सूतक प्रातः 6:00 बजे से प्रभावी माना जाएगा। परंपरा के अनुसार ग्रहण से नौ घंटे पूर्व और ग्रहण समाप्ति के नौ घंटे पश्चात तक सूतक काल प्रभावी रहता है। इस दौरान मंदिरों के पट बंद रखने तथा धार्मिक अनुष्ठान स्थगित रखने की परंपरा है।
सूर्य ग्रहण का प्रभाव—
3 मार्च को ही प्रातः 3:20 बजे से 6:45 बजे तक सूर्य ग्रहण का योग बन रहा है। ज्योतिषविदों का मानना है कि ग्रहण काल में स्नान, दान और मंत्र जप का विशेष महत्व होता है, जबकि शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त—
तिथि: 2 मार्च 2026, सोमवार
भद्रा समाप्ति: प्रातः 5:19 बजे
प्रमुख दहन समय: सायं 6:55 से 9:00 बजे तक
विशेष रात्रिकाल: 11:30 बजे से 2:30 बजे तक





