तालाब की जमीन पर कब्जे के आरोपों के बीच प्रशासन का एक्शन, सुभाष नगर में एसडीएम की मौजूदगी में हुईं पैमाइश: तालाब की भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग कराने के आरोपों की भी चर्चा, P-7 न्यूज पर पढ़े क्या है पूरा मामला
चंदौली— नगर पालिका क्षेत्र के सुभाष नगर स्थित तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पहले जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद रविवार को एसडीएम राजीव मोहन सक्सेना की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने तालाब की पैमाइश कराई। नापी शुरू होते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। राजस्व विभाग की टीम ने अभिलेखों के आधार पर तालाब की सीमा का निर्धारण शुरू किया। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि तालाब की वास्तविक भूमि कितनी है और उस पर कितना निर्माण हुआ है। बताया जा रहा है कि तालाब की जमीन पर वर्षों से मकान बन चुके हैं और कई हिस्सों में प्लॉटिंग कर भूखंड बेचे गए हैं। कई संपत्तियों का दाखिल-खारिज भी हो चुका है, जिससे मामला और जटिल हो गया है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि भू-माफियाओं ने तालाब की भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग कराई. हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी किसी व्यक्ति के खिलाफ आधिकारिक पुष्टि या निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है। राजस्व विभाग का कहना है कि पैमाइश और अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब नगर पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज तालाबों के अस्तित्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर पालिका के अभिलेखों में कुल 51 तालाब दर्ज हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 9 तालाब ही जमीन पर मौजूद मिले हैं। शेष 42 तालाबों का पिछले करीब 15 वर्षों से कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है। नगर पालिका और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से इन तालाबों की तलाश और सीमांकन की कार्रवाई कर रहे हैं। नगर पालिका के अनुसार वर्ष 2011 में तैयार सूची में नगर क्षेत्र के 46 तथा कूढ़े खुर्द और कुढ़कला के पांच तालाब दर्ज किए गए थे। इनमें आठ तालाब मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर हैं, जबकि एक तालाब की नीलामी न्यायालय के स्थगन आदेश के कारण रुकी हुई है। अधिशासी अधिकारी धर्मराज सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में तालाब की भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कब्जे हटाने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद तालाब की भूमि पर निर्माण कराने वालों और प्लॉट खरीदने वालों में भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक तालाबों की निगरानी नहीं होने के कारण सार्वजनिक जलाशयों पर अतिक्रमण होता चला गया। अब प्रशासन की कार्रवाई से पूरे शहर में तालाबों की भूमि की जांच और अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज होने की उम्मीद है।