10 अप्रैल का वह दिन… जब दोस्ती दुश्मनी में बदल गई: बलुआ के महड़ौरा में शुरू हुई खून की कहानी, एक साल में दो हत्याओं से कांपा इलाका, पहले पूर्व प्रधान की हत्या, फिर बदले में प्रधानपति को गोलियों से भून दिया गया… पढ़े P-7 न्यू की खास रिपोर्ट
चंदौली— यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन हकीकत में यह खून और बदले की सच्ची दास्तान है। तारीख—10 अप्रैल 2020… जगह—बलुआ थाना क्षेत्र का महड़ौरा गांव जहां दोस्ती ने अचानक दुश्मनी का रूप ले लिया। शाम का वक्त था। लॉकडाउन के बीच गांव की चट्टी पर पूर्व प्रधान मनोज यादव चुनावी चर्चा में जुटे थे। माहौल सामान्य था, लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया। बाइक सवार दो बदमाश आए… और बिना कुछ कहे ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियां सीधे मनोज के सीने में लगीं। वह वहीं गिर पड़े। अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जिंदगी की जंग हार गए। गांव में सन्नाटा छा गया… और शुरू हुई शक, साजिश और सियासी वर्चस्व की जंग। आरोप लगा गांव के ही प्रधानपति पंकज सिंह पर—कि उन्होंने सुपारी देकर अपने ही कभी करीबी दोस्त रहे मनोज की हत्या कराई। पुलिस की जांच लंबी चली, कई मोड़ आए। आखिरकार शूटर पकड़े गए और साजिश की परतें खुलीं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… महड़ौरा आज भी शांत दिखता है… लेकिन गांव की गलियों में उस दौर की गोलियों की गूंज अब भी सुनाई देती है।
सीन-2: बदले की आग—
तारीख—1 जून 2021, सुबह का समय। पंकज सिंह, जो जमानत पर घर लौटे थे, अपने भाई के साथ पंपिंग सेट पर पहुंचे थे। शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि मौत उनका इंतजार कर रही है। अचानक दो बाइकों पर सवार छह बदमाश वहां पहुंचे और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। फिर गोलियों की गूंज… एक के बाद एक फायर। पंकज भागने की कोशिश करते रहे, लेकिन कुछ ही कदमों में गिर पड़े। शरीर में कई गोलियां धंसी थीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हमलावर फरार हो गए… और पीछे छोड़ गए खून से सनी जमीन और दहशत में डूबा गांव।
कोटा लेने के लिए खुली बैठक से शुरू हुआ था विवाद—
बलुआ थाना क्षेत्र के महडौरा गांव की खूनी दास्तान की शुरुआत कोटा लेने के लिए गांव में रखी गई एक खुली बैठक के साथ शुरू हुआ था. आरोप लगा के प्रधानी का चुनाव जीतने के बाद मनोज यादव ने पंकज को गांव कोटा देने की बात कही थी. बाद में मनोज मुकर गया और अपने कुछ शर्त पंकज के सामने रख दी. पंकज सिंह को वह शर्त मंजूर नहीं था. यही से दोस्ती दुश्मनी में बदल गई.
खूनी चक्र का अंत या शुरुआत?
जांच में सामने आया कि यह हमला बदले की आग में किया गया था. मनोज यादव की हत्या का हिसाब चुकता करने के लिए यह दूसरा कत्ल हुआ। एक साल के भीतर दो हत्याओं ने महड़ौरा गांव को दहला दिया था. कभी एक साथ बैठने वाले लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे बन गए थे.