जयप्रकाश तिवारी (jai tiwari)
चंदौली— फतेहपुर के एक साधारण किसान परिवार में 18 जून 1991 को जन्मे आकाश पटेल ने संघर्ष और लगन के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है. पिता बाबूराम के सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े आकाश ने शुरुआती शिक्षा के बाद हिंदी साहित्य में एमए किया और देश सेवा का सपना देखाम उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कठिन परिस्थितियों में की और 2019 बैच में आईपीएस बनकर अपने लक्ष्य को हासिल किया. आकाश पटेल को शासन ने अप चंदौली जिले की कमान सौंपी है, इससे पहले वह वाराणसी कमिश्नरेट में गोमती जोन डीसीपी के पद पर थें. आईपीएस प्रशिक्षण के दौरान आकाश पटेल ने अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया. प्रशिक्षण के समय से ही वे अपने स्पष्ट निर्णय और कार्यशैली के लिए पहचाने जाने लगे थे.
वाराणसी में डीसीपी रहते हुए अपराध नियंत्रण में निभाई अहम भूमिका—
उत्तर प्रदेश कैडर में नियुक्ति के बाद आकाश पटेल ने कानपुर और वाराणसी सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं। वाराणसी कमिश्नरेट में डीसीपी गोमती जोन के रूप में उन्होंने अपराध नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाया। उनके नेतृत्व में सेक्स रैकेट और अन्य संगठित अपराधों के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए गए, जिससे अपराधियों में खौफ और आम जनता में भरोसा बढ़ा।
मानवीय संवेदनाओं के लिए भी जाने जाते हैं—
सख्त पुलिस अधिकारी होने के साथ ही आकाश पटेल का मानवीय चेहरा भी लोगों के बीच चर्चा में रहा. एक बार गोमती जोन में सड़क हादसे में घायल 9 वर्षीय बच्चे को उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी से तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जिससे बच्चे की जान बच सकी. इस कार्य की व्यापक सराहना हुई.
लेखन में भी रुचि, भावनाओं को शब्दों में ढालने की कला
आकाश पटेल को लेखन का भी शौक है. उनकी लिखी पंक्तियां
“बहुत नाज था हमें अपनी हक़ परस्ती का,
जो आज बेख़बर हैं, कभी रहनुमा थे हम”
उनकी संवेदनशील सोच और गहराई को दर्शाती हैं.
अब चंदौली की कमान, कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की उम्मीद—
अब आकाश पटेल को चंदौली जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. युवा उम्र में ही अपनी सूझ-बूझ, निर्णय क्षमता, अनुशासन और अपराध नियंत्रण के लिए पहचान बना चुके आकाश पटेल से जिले में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है. उनकी तैनाती से यह साफ संकेत है कि प्रशासन चंदौली में प्रभावी पुलिसिंग और सख्त कानून व्यवस्था चाहता है.





