चंदौली—अलीनगर थाना क्षेत्र के पचफेडवा इलाके में जनजीवन रोज़ खतरे के साये में गुजर रहा है। यहां स्थित व्यस्त हाइवे को पार कर स्कूली छात्र-छात्राओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों को प्रतिदिन आना-जाना पड़ता है. तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करना किसी जुआ खेलने से कम नहीं है, लेकिन वर्षों से यह मजबूरी बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान दर्जन भर से अधिक गांवों को जनपद मुख्यालय से जोड़ता है. इसके बावजूद यहां न तो फुट ओवरब्रिज है और न ही अंडरपास. मजबूरी में बच्चे अपने स्कूल बैग के साथ हाइवे पर दौड़ते नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महीने में औसतन एक बार यहां सड़क दुर्घटना में किसी न किसी की मौत हो जाती है, फिर भी यह इलाका प्रशासन की प्राथमिकता में नहीं आ सका है.
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह इलाका अब एक स्थायी दुर्घटना जोन बन चुका है, लेकिन न तो स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं और न ही चेतावनी संकेतक. ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती भी नहीं होती, जिससे हालात और भयावह हो जाते हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि पचफेडवा में फ्लाईओवर या सुरक्षित अंडरपास की मांग लंबे समय से की जा रही है. प्रस्ताव कई बार उठे, लेकिन हर बार यह मुद्दा राजनीति का शिकार हो गया. चुनाव के समय आश्वासन दिए जाते हैं, पर उसके बाद फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं. लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल इस स्थान को दुर्घटना जोन घोषित कर सुरक्षा के ठोस इंतजाम करे, ताकि स्कूली बच्चों और आम नागरिकों की जान सुरक्षित रह सके. सवाल यह है कि आखिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा जिला प्रशासन, या समय रहते इस जनहित मुद्दे पर कार्रवाई होगी?
अलीनगर के पचफेडवा में रोज जान जोखिम में डाल कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे : दुर्घटना जोन बनने के बावजूद प्रशासन की अनदेखी और फ्लाईओवर की मांग राजनीति में उलझी पढ़ें P-7 की खास न्यूज
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