चंदौली— पं.दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) से शराब तस्करी का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है. हालात यह हैं कि इक्का-दुक्का तस्करों की गिरफ्तारी दिखाकर औपचारिक कार्रवाई पूरी कर ली जाती है, जबकि बड़ी खेप की तस्करी धड़ल्ले से जारी है. सूत्रों पर विश्वास करें तो केवल मुगलसराय से लाखों रुपये की शराब और बीयर लेकर तस्कर डीडीयू जक्शन से ट्रेन पकड़ कर बिहार जाते हैं.
इससे साफ है कि शराब तस्करी अब “हाथी के दांत” बन चुकी है, जो दिखाने और खाने के लिए अलग-अलग हैं. विगत दिनों आरा के बाद जमीरा हाल्ट पर सीमांचल एक्सप्रेस की चेन पुलिंग कर बड़ी संख्या में शराब तस्करों के उतरने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी. इस दौरान ट्रेन में तैनात आरपीएफ एस्कॉर्ट पर पथराव और फायरिंग तक की वारदात सामने आई, जिससे रेलवे सुरक्षा बल की तैयारियों और सतर्कता पर सवाल खड़े हो गए.
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में तस्कर ट्रेन में सवार कैसे हो जाते हैं. यार्ड या स्टेशन परिसर में बिना किसी की जानकारी के उनका प्रवेश और गतिविधियां संभव नहीं मानी जा रही हैं. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि बिना मिलीभगत के इतनी संगठित तस्करी चल पाना मुश्किल है.

आरपीएफ की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है. पूर्व में शराब तस्करों द्वारा दो आरपीएफ जवानों की हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. वहीं हाल के दिनों में शराब तस्करी को लेकर आरपीएफ और जीआरपी के बीच हाथापाई की स्थिति भी बन चुकी है, जो आपसी समन्वय की कमी और आंतरिक तनाव को दर्शाती है. लगातार हो रही इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कानून की रक्षा की शपथ लेने वाली एजेंसियां आखिर अपने मूल उद्देश्य से कैसे भटक गईं, यह अब जांच का विषय बनता जा रहा है. डीडीयू जंक्शन से जुड़ी इन घटनाओं ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग को और तेज कर दिया है, ताकि शराब तस्करी के इस संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके.





