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गिरफ्तारी की जानकारी से अनभिज्ञ निकले डीडीयू जीआरपी इंस्पेक्टर, 24 लाख 40 हजार की बरामदगी पर नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब, जाने क्या है पूरा मामला…

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Published on: 1 November 2025, 8:04 am IST
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चंदौली। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर शनिवार को अमृतसर-हावड़ा एक्सप्रेस से जीआरपी ने 24 लाख 40 हजार रुपये के साथ एक युवक को हिरासत में लिया, मगर हैरानी की बात यह रही कि गिरफ्तारी के बाद खुद जीआरपी इंस्पेक्टर एसके सिंह मामले की पूरी जानकारी से अनभिज्ञ नजर आए। पकड़े गए युवक ने अपना नाम घनश्याम वर्मा निवासी मऊ बताया, लेकिन पुलिस के पास उसकी पृष्ठभूमि और धन के स्रोत से संबंधित कोई ठोस जानकारी नहीं थी. सूत्रों के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर नियमित चेकिंग अभियान के दौरान ट्रेन से उतरते समय संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने घनश्याम को रोका. तलाशी में उसके बैग से 24 लाख 40 हजार रुपये नकद बरामद हुए. इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने युवक से पूछताछ शुरू की, लेकिन वह धन के स्रोत और गंतव्य के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया. इसके बाद दोपहर 12 बजे जीआरपी इंस्पेक्टर एसके सिंह ने थाने पर प्रेस वार्ता बुलाई, मगर वहां भी कई सवाल अनुत्तरित रह गए. पी सेवन न्यूज पोर्टल के प्रतिनिधि ने जब पूछा कि युवक को किस प्लेटफार्म से पकड़ा गया, तो इंस्पेक्टर ठोस जवाब नहीं दे पाए. इसी तरह जब उनसे यह जानना चाहा गया कि आरोपी मऊ जिले के किस इलाके का रहने वाला है, इस पर भी वे चुप्पी साधे रहे. पत्रकारों के लगातार सवालों से असहज हुए इंस्पेक्टर ने केवल इतना कहा कि मामले की जांच की जा रही है और विभिन्न जांच एजेंसियों को सूचना दे दी गई है। हालांकि, उनके अस्पष्ट जवाबों ने न केवल जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े किए बल्कि इस बात पर भी शक जताया गया कि कहीं पुलिस बिना पर्याप्त जांच के ही मीडिया के सामने मामला पेश तो नहीं कर रही! स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब इतनी बड़ी राशि किसी के पास से बरामद होती है तो पुलिस को उसके स्रोत, उपयोग और संबंधों की स्पष्ट जानकारी जुटाने के बाद ही सार्वजनिक बयान देना चाहिए. बिना तैयारी के प्रेस वार्ता बुलाना, और फिर उसमें ठोस जानकारी न दे पाना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है.
फिलहाल जीआरपी ने मामले की जांच आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर शुरू कर दी है. अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि बरामद रकम किसी व्यावसायिक लेनदेन से जुड़ी थी या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि का हिस्सा.वहीं, इंस्पेक्टर की अनभिज्ञता ने विभागीय समन्वय और पेशेवर दक्षता की कमी को भी उजागर कर दिया है.

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