चंदौली/वाराणसी। जुआ अब केवल ताश के पत्तों का खेल नहीं रहा… जुए के फड़ हाईटेक हो चुके हैं और इसे ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के रूप में चलाया जा रहा है. जिसके बदले जुए की फड़ सजाने वाले फड़दार और बुक्की को मोटा मुनाफा होता है. इस पैसे को केवल फड़दार अपने तक नहीं रखता, सूत्रों पर विश्वास करें तो जुए की कमाई का हिस्सा सफेदपोश से लगायत खाकी वर्दी तक पहुंचती है.
चंदौली जिले के बखरा सिवान में पुलिस ने छापेमारी कर मौके से 14 जुआड़ियों को पकड़ने के साथ बाइक और नकदी भी बरामद की है, लेकिन जुए का यह सिंडिकेट यहीं खत्म नहीं होता है. चंदौली जिले से लगायत बनारस तक ऐसे कई जुए के फड़ अब भी रोज गुलजार हैं, जहां दिनभर में करोड़ों का वारा-न्यारा ताश के पत्ते तय करते हैं. सूत्रों पर विश्वास करें तो इन दिनों पूर्वांचल का सबसे बड़ा जुए का फड़ रोहनिया थाना क्षेत्र के फरीदपुर ताल के पास एक मकान के अंदर चल रहा है. इस मकान की छत पर रखी पानी की टंकी रोज पानी से भरे या नहीं, लेकिन यहां जुए का फड़ सजाने वाला मोनू उर्फ आकाश (काल्पनिक नाम) रोज अपना झोला भरता है.
फरीदपुर ताल में स्थित इस जुए के फड़ पर बनारस, चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर और आजमगढ़ से रोज जुआड़ी पहुंचते हैं. एक बजे दोपहर से ताश के पत्तों पर दांव लगना शुरू होता है, जो रात तक चलता है. यहां दो युवक बुक लगाते हैं. चंद घंटों में ही यहां 70-80 लाख रुपये की हार-जीत आम बात है। यहां प्रतेक खिलाड़ियों की एंट्री उनके पहचान से होती है। नए जुआड़ियों का यहां पहुंचना मुश्किल होता है.
जुए की शिकायत पर एसओजी प्रभारी बन युवक का किया था अपहरण —
फरीदपुर ताल में जुआ चलाने वाला मोनू उर्फ आकाश (काल्पनिक नाम) पूर्वांचल में जितना अपने जुए के फड़ के लिए जाना जाता है, उतना ही अपने रसूख के लिए भी चर्चित है. सूत्र बताते हैं कि थार कार से चलने वाले मोनू ने कुछ माह पूर्व नेशनल हाईवे से एक युवक का एसओजी प्रभारी बनकर अपहरण किया था. मामला उसके जुए के फड़ की शिकायत से जुड़ा था। आरोप है कि युवक को चार लोगों ने बंधक बनाकर लाठी-डंडों से पिटाई की थी. हालांकि इस मामले में रोहनिया थाने में पीड़ित युवक द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद फरीदपुर में ताश के पत्तों पर अब भी रोज करोड़ों का दांव लग रहा है.
पड़ाव पर चर्चित है टिमकालू के जुए फड़ की टिमटिमाहट…
चंदौली जिले में ही पड़ाव- दूल्हीपुर मार्ग पर स्थित एक नामी अपार्टमेंट के पीछे खुले मैदान में भी लंबे समय से जुए का फड़ चल रहा है. सूत्र बताते हैं यहां रोजाना 50-60 की संख्या में बाइक और कार से जुआ खेलने के शौकीन पहुंचते हैं और अपने सामर्थ्य के मुताबिक ताश के पत्तों पर अंदर-बाहर की बाजी लगाते हैं. इस फड़ को चलाने वाले टिमकालू (काल्पनिक) नाम की टिमटिमाहट दूर से ही जुआड़ियों को फड़ पर खींच लाती है. सुबह से ही यहां जुआड़ी पहुंचने लगते हैं. बाइक और कार को सड़क के अलावा अपार्टमेंट के पीछे की ओर मौजूद रास्ते पर लगाया जाता है। ताकी यदि हवा खराब हो (पुलिस की छापेमारी) तो जुआड़ी अपने साधन समेत भाग सके। हालांकि टिमकालू के साथ इस फड़ को चलाने वाले 500 मीटर के दायरे में नजर बनाए रहते हैं. जैसे की कोई अनचाही गतिविधि नजर आती है वैसे ही सब सतर्क हो जाते हैं.





