Jai tiwari —
चंदौली/वाराणसी— सड़क पर दौड़ता कोई सामान्य ट्रक नहीं, बल्कि 308 पहियों पर चलता करीब 200 टन वजनी विशालकाय काफिला… जिसे देखकर चंदौली-वाराणसी की सड़कों पर लोग ठिठक गए. पांच महीने से जारी सफर के बाद सोमवार को यह भारी-भरकम मशीन चंदौली से वाराणसी पहुंची तो देखने वालों की भीड़ जुट गई.
दरअसल, यह विशाल बॉयलर मशीन लखीमपुर खीरी के कुंभी पीपीएल डिवीजन में तैयार हो रहे नए प्लांट के लिए ले जाई जा रही है. मशीन समुद्री रास्ते से ओडिशा पहुंची और इसके बाद सड़क मार्ग से वाराणसी तक लाई गई. इसे यहां से आगे ले जाने के लिए भी कई स्थानों पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं.
जहां से गुजरता है काफिला, रुक जाती हैं नजरें —
विशालकाय ट्रक के साथ करीब 40 लोगों की टीम चल रही है. काफिले में 14 से अधिक वाहन शामिल हैं. मशीन को रास्ते में निकालने के लिए कहीं सड़क किनारे लगे बोर्ड हटाए जा रहे हैं तो कहीं बिजली के खंभों को हटाने की कवायद चल रही है. पुल और सड़क की स्थिति को देखते हुए पहले से रास्ते की जांच की जा रही है.
डाफी टोल प्लाजा के पास भी मशीन को आगे निकालने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया. बारिश के कारण सड़क पर भी दिक्कतें सामने आईं, जिसके चलते मरम्मत कार्य और यातायात व्यवस्था में टीमें लगी रहीं.
ट्रक ही बना कर्मचारियों का घर —
इस अभियान की सबसे दिलचस्प बात यह है कि मशीन के साथ चल रहे कई कर्मचारियों का अस्थायी घर भी यही ट्रक बना हुआ है. ट्रक पर खाना बनाने से लेकर आराम करने और रात में सोने तक की व्यवस्था है. तिरपाल के नीचे कर्मचारियों ने अपनी छोटी-सी गृहस्थी जमा रखी है.
काफिले की धीमी रफ्तार के कारण यह सफर बेहद लंबा हो रहा है. चालक के अनुसार प्रतिदिन करीब 200 लीटर डीजल खर्च हो रहा है. अब तक डीजल पर दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की बात भी सामने आई है.
308 पहियों पर चल रही 200 टन की यह मशीन फिलहाल वाराणसी में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि भारी-भरकम मशीन अपने अगले पड़ाव तक कब पहुंचती है.












