Chandauli News: 10 सितंबर से रामगढ़ में आस्था का महाकुंभ! बाबा कीनाराम के 427वें जन्मोत्सव पर जुटेगा जनसैलाब, तीन दिन गूंजेंगे भोजपुरी, कव्वाली और बिरहा के सुर; जानें कौन-कौन आएगा
चंदौली—अघोरपीठ के गुरुपीठ रामगढ़ में संत शिरोमणि बाबा कीनाराम का 427वां त्रिदिवसीय जन्मोत्सव समारोह 10 से 12 सितंबर तक धूमधाम से आयोजित किया जाएगा. ऐतिहासिक और भव्य आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. समारोह की अगुवाई अघोरपीठ के 11वें पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी करेंगे.
तीन दिनों तक चलने वाले इस विशाल मेले और सांस्कृतिक महोत्सव में अध्यात्म के साथ लोक संस्कृति और संगीत की भी शानदार झलक देखने को मिलेगी. आयोजन में राजनीति, प्रशासन, कला और अध्यात्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों के पहुंचने की संभावना है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी पुलिस प्रशासन तैयारियों में जुटा है.
पहले दिन भोजपुरी सितारों से सजेगी शाम —
जन्मोत्सव समारोह के पहले दिन 10 सितंबर, गुरुवार को भोजपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसमें भोजपुरी अभिनेता एवं गायक समर सिंह, मनोज यादव, मोनू अलबेला, पवन परदेशी, राकेश तिवारी और ज्योति माही सहित कई कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. भोजपुरी गीत-संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियों से रात गुलजार होगी.
दूसरे दिन कव्वाली में होगा मुकाबला —
11 सितंबर, शुक्रवार को कव्वाली मुकाबले का आयोजन किया जाएगा। इसमें कव्वाल वसीम वारसी और नाज वारसी आमने-सामने होंगे. दोनों के बीच कव्वाली का मुकाबला देर रात तक चलने की उम्मीद है। कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं और क्षेत्रीय लोगों में खासा उत्साह है.
अंतिम दिन होगा बिरहा दंगल —
समारोह के अंतिम दिन 12 सितंबर, शनिवार को बिरहा दंगल का आयोजन होगा. इसमें बिरहा सम्राट विजय लाल यादव और रुचि यादव के बीच मुकाबला होगा. लोकगीत और बिरहा की प्रस्तुति के जरिए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.
कार्यक्रम का विवरण —
सुरक्षा को लेकर पुलिस रहेगी अलर्ट —
बाबा कीनाराम जन्मोत्सव और मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए बलुआ पुलिस मुस्तैद रहेगी. भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पुलिस की ओर से आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेंगे.
तीन दिनों तक रामगढ़ में आध्यात्मिक आस्था के साथ भोजपुरी संगीत, कव्वाली और बिरहा की रंगत देखने को मिलेगी. समारोह को भव्य बनाने के लिए आयोजन समिति की ओर से तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.