हाजीपुर/डीडीयू —पूर्व मध्य रेल के नए महाप्रबंधक के रूप में डिम्पी गर्ग ने मंगलवार को पदभार ग्रहण कर लिया. इससे पहले वे उत्तर रेलवे, नई दिल्ली में प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता के पद पर कार्यरत थे.
भारतीय रेल यांत्रिक इंजीनियरिंग सेवा के 1990 बैच के अधिकारी गर्ग स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिसशिप के जरिए रेलवे सेवा में आए थे. वे अपने बैच के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं. रेलवे में 32 साल से अधिक के कार्यकाल में उन्होंने बुनियादी ढांचे, रोलिंग स्टॉक, परिचालन, संरक्षा, प्लानिंग और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है.
गर्ग ने पश्चिम रेलवे के आबू रोड में एएमई/डीजल के रूप में रेल सेवा शुरू की. इसके बाद उत्तर रेलवे और रेलवे बोर्ड में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली. वे दिल्ली मंडल में वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता, अपर मंडल रेल प्रबंधक और मंडल रेल प्रबंधक रह चुके हैं. उत्तर रेलवे मुख्यालय में प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी और प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता के पद पर भी सेवाएं दी हैं. इसके अलावा आरवीएनएल में अपर महाप्रबंधक तथा रेलवे बोर्ड में कार्यकारी निदेशक/कोचिंग और कार्यकारी निदेशक/संरक्षा जैसे पदों पर भी कार्य किया है.
मुंबई सेंट्रल कोचिंग डिपो को दिलाया था ISO 9002 प्रमाणन —
परियोजना निष्पादन और रेलवे इंजीनियरिंग में उत्कृष्ट कार्य के लिए गर्ग को कई पुरस्कार मिल चुके हैं. वर्ष 2001 में मुंबई सेंट्रल कोचिंग डिपो के सुधार और उसे भारतीय रेलवे का पहला ISO 9002 प्रमाणित कोचिंग डिपो बनाने में योगदान के लिए उन्हें जीएम अवार्ड मिला था. वर्ष 2007 में रेलवे बोर्ड में डायरेक्टर प्लानिंग (एमई) के रूप में रोलिंग स्टॉक की जरूरतों के आकलन और वार्षिक योजना तैयार करने में योगदान के लिए उन्हें रेल मंत्री ने सम्मानित किया था.
गर्ग ने ईरमी, जमालपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है. उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, कोलकाता और इंजीनियरिंग काउंसिल, लंदन से भी उच्च शिक्षा हासिल की है.जर्मनी और स्विट्जरलैंड में एलएचबी कोच मेंटेनेंस तथा स्वीडन में व्हील-रेल इंटरेक्शन से संबंधित प्रशिक्षण लिया है. आईआईएम अहमदाबाद और विश्व बैंक के इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस पाठ्यक्रम में भी भाग लिया है. रेलवे प्रशासन को उम्मीद है कि गर्ग के लंबे अनुभव और कुशल नेतृत्व से पूर्व मध्य रेल की परिचालनिक दक्षता, संरक्षा और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी.









