रिपोर्ट —जय प्रकाश तिवारी
चंदौली। जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस और क्राइम ब्रांच की सक्रियता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दरअसल, मंगलवार को वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी स्तर से गौ तस्करों पर 50–50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था और 54 गौ तस्करों की सूची जारी की गई थी। इसमें सबसे ज्यादे वांछित चंदौली जिले के हैं, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी एक भी इनामी अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इनाम घोषित होने के बाद उम्मीद थी कि जिला पुलिस और क्राइम ब्रांच अभियान चलाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई। सूत्रों का कहना है कि नामजद और वांछित अपराधियों की लोकेशन ट्रैकिंग और दबिश की कवायद कागजों तक सीमित है। गौरतलब है कि जिले में रोहिताश पाल हत्याकांड के बाद तत्कालीन क्राइम ब्रांच प्रभारी आशीष मिश्रा को हटाया गया था। एसपी आदित्य लांघे ने उनकी जगह राम बदन को नई जिम्मेदारी सौंपी थी। यह बदलाव इसलिए किया गया था ताकि टीम को नई दिशा मिले और गंभीर मामलों में ठोस कार्रवाई हो सके, हालांकि नए क्राइम ब्रांच प्रभारी के आने के बाद भी टीम कुछ अबतक कुछ खास नहीं कर पाई है। क्राइम ब्रांच की कार्रवाई मुख्य रूप से शराब और गांजा बरामदगी तक सीमित है, जबकि संगठित अपराध और बड़े गिरोहों के गुर्गे जिले में एक्टिव हैं। 54 इनामी गौ तस्करों की सूची जारी होने के बाद भी गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला पुलिस और क्राइम ब्रांच कब तक इन फरार अपराधियों को पकड़ने में सफलता हासिल करती है या फिर यह मामला भी फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।





